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मोरारी बापू के नाम पत्र

मोरारी बापू के अली मौला और इस्लाम की मार्केटिंग करने से क्षुब्ध उनके एक पूर्व भक्त का “खुला खत”

माननीय

श्री_मोरारी_बापू जी,

हमारे शास्त्रों में अपराध के लिए, चाहे वो अनजाने में ही क्यों न हुआ हो, प्रायश्चित का विधान है. आपसे ही राम कथा में सुना था कि एक बार माँ पार्वती जी भगवान राम की मानवीय लीला से भ्रमित हो जाती हैं और उनकी परीक्षा लेने चली जाती हैं. वो परीक्षा के लिए माता सीता का रूप धारण कर लेती हैं. भगवान राम पहचान लेते हैं कि ये माता पार्वती हैं. यहाँ माँ पार्वती ने अनजाने में एक बार सीता जी का रूप बस धारण किया था और महादेव ने उनका परित्याग कर दिया, कि जिस शरीर से उमा माँ सीता का रूप धारण कर चुकी हैं उस शरीर को अपनी वामांगी नहीं बना सकता. माँ पार्वती को इस शरीर को अग्नि में भष्म कर अगले जन्म में कठोर तपस्या कर शिव को प्राप्त करना पड़ा.

यही प्रायश्चित का शास्त्र नियम आप पर भी लागू होता है कि जीवनपर्यंत रामकथा करके यश, कीर्ति, पहचान बनाने के बाद अंतकाल में आपके भीतर से बिना प्रयास अली मौला, या अल्लाह निकलने लगा है. दुनिया में एक भी ऐसा उदाहरण नहीं है जो जिन्दगीभर अली मौला जपा हो और अंत में अनायास उसके भीतर से राम-राम निकलने लगा हो. पचास साल रामकथा करने के बाद, रामकथा के बीच में “राम-राम” की जगह आपके भीतर से जो “अली मौला” अवतरित हो जाता है. इसने राम की महिमा को कलंकित किया है. आपके जिस शरीर ने यह अपराध किया है उसे अब रामकथा करने का कोई अधिकार नहीं है.

भगवान राम के राज्याभिषेक में हनुमान, सुग्रीव, अंगद, जामवंत आदि सभी वानर यूथपति सम्मिलित हुए थें और उसके बाद प्रभु चरणों से दूर नहीं जाकर अयोध्या में ही बस जाना चाहते थें. भगवान ने कुछ समय तक उनकी बात मानी, फिर हनुमान जी को छोड़कर बाकी सभी को उनके घर भेज दिया. उसका कारण यह था कि जब सभी अपने-अपने घरों में निवास करते थें तो वहाँ अपने परिवार के बीच रहते हुए भी मन से राम का चिंतन करते रहते थें, पर अब यहाँ अयोध्या में शरीर से तो राम के निकट हैं पर मन से अपने परिवार के विषय में चिंतन कर रहे हैं. भगवान ने उन्हें घर इसलिए भेज दिया कि वे वहीं रहकर ईश्वर का चिंतन करें, इसी में उनका कल्याण है. ऐसे ही आप रामकथा में व्यासपीठ पर बैठकर “अली मौला” में डूबकर राम नाम की महिमा की अवहेलना किये हैं, उसका प्रायश्चित्त यही है कि आप एकांत में जाकर राम का चिंतन करें.

आप रामकथा के व्यासपीठ पर बैठकर “अल्लाह हू” और “नमामि शमीशान” को एक कर देने के लिए शास्त्र संशोधन तक करने पर आतुर हैं. आप रामकथा के लिए आये लोगों को अल्लाह हू जपा रहे हैं. चलिए इसी मोहब्बत के पैगाम को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम धर्मगुरुओं के मंच से राम जपवा देतें, पर आप तो वहाँ भी “बिस्मिल्लाह रहमान ए रहीम” की अलख जगाने लगें. मतलब आप रामकथा के मंच पर भी अल्लाह हू गायेंगे और मुस्लिम धर्मगुरुओं के मंच से भी बिस्मिल्लाह गायेंगे, तो क्या ये शास्त्र संशोधन कर एकतरफा मोहब्बत हिन्दुओं को ही निभाना है. आपकी इन हरकतों से सनातन की जड़ें कमजोर हो रही हैं, अगर आपको ये नहीं दीख रहा है तो आप में दूरदर्शिता का अभाव है और ऐसे अदूरदर्शी कथावाचक को हिन्दू समाज और अधिक झेलने के लिए तैयार नहीं है.

पचास साल से आप राम को बेचकर अपना गुजारा कर रहे हैं. सनातन धर्म ने आपको मान-सम्मान, पहचान सबकुछ दिया. अब आप अपना रिपोर्ट कार्ड सनातनियों को दिखाइये कि आपने “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” की दिशा में अबतक कितनो को सनातन धर्म में घर वापसी करवायी है. आप घर वापसी क्या करवायेंगे, आप तो खुद उनके आगे घुटने टेक दियें. पहले से सेक्युलर हिन्दू को आप और सेक्युलर बनाकर उसे और उसकी आनेवाली पीढ़ी को लव जिहाद की ओर धकेल रहे हैं. आपके ये सारे अपराध अक्षम्य हैं.

आपको तुलसीदास के रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली, कवितावली आदि ने आज इस मुकाम पर पहुँचाया है. तुलसीदास ने जो रामचरितमानस और विनयपत्रिका आदि अपने आराध्य राम की महिमा में लिखा है. उन्होंने राम के लिए “करुणानिधान” शब्द का प्रयोग किया है और आप उनके पदों का उपयोग कर मोहम्मद पैगम्बर को करुणानिधान साबित करने लगें. आपने दुनियाभर की पुस्तकें पढ़ी हैं. निस्संदेह आपने कुरान और हदीस भी पढ़ी होगी. इन पुस्तकों को पढ़ने के बाद आपको अच्छे से पता चल गया होगा कि एक अल्लाह के अलावा कोई और ईश्वर नहीं है. आपके राम को ज्यादा से ज्यादा वो एक नबी का दर्जा दे सकते हैं, लेकिन कोटि ब्रहमाण्ड नायक ईश्वर कभी नहीं मान सकतें. यह जानते हुए आपने तुलसी के राम को अल्लाह के साथ घालमेल किया. यह आपने तुलसीदास के साथ भी द्रोह किया है.

तुलसीदास ने अपने इष्ट के प्रति अव्यभिचारिणी भक्ति का प्रतिपादन किया है. वे कहते हैं -” एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास। एक राम घन स्याम हित चातक तुलसीदास।।” अर्थात तुलसीदास जी को सिर्फ एक राम का ही भरोसा है, उनको एक राम के ही बल का आश्रय है और उनकी सारी आशायें राम से ही हैं. तुलसी की भक्ति चातक की तरह एकनिष्ठ है जो सिर्फ स्वाति नक्षत्र के बारिश के पानी को ही अपने भीतर प्रवेश होने देती है, अगर वो प्यास से तड़प रही हो और वो गंगाजल में गिर जाये तो भी वो गंगाजल का पानी अपने मुँह में प्रवेश नहीं होने देती है और अपना चोंच बाहर की तरफ निकाल देती है.

आपने तुलसीदास की इस एकनिष्ठ भक्ति का अपमान किया है. इतना बड़ा अपराध करने के बाद भी यदि आपको ये नहीं लगता है कि आपने कुछ भी गलत किया है तो इसी से पता चलता है कि आपका अंत:करण कितना मलिन हो चुका है. ये आपकी निर्लज्जता और ढीठता की पराकाष्ठा है. यदि आपने अपने संघर्ष के दिनों में अपना यह कालनेमि का रूप दिखा दिया होता तो ये आप भी जानते हैं कि आप आज इतनी ऊँचाई पर नहीं पहुँचे होतें. उस समय आपने सिर्फ राम का गुणगान किया और जब लोगों ने आपको अपने दिल में बैठा लिया तो आज आप अपनी इस विशेष स्थिति का नाजायज फायदा उठाते हुए लोगों के दिलों में राम की जगह अल्लाह को घूसेड़ रहे हैं. अब किसी का मन नहीं मान रहा है कि इतना सबकुछ केवल संयोग से, बिना किसी बड़े षड़यंत्र के अपनेआप हो रहा है.

रामायण में एक प्रसंग है कि गौतम ऋषि जब प्रातः काल स्नान करने गये हुए हैं, उस बीच इंद्र गौतम ऋषि का रूप धारण कर उनकी पत्नी अहिल्या के पास आकर अपना परिचय देता है. अहिल्या यह जान जाती हैं कि ये इंद्र है, लेकिन वो यह सोचकर प्रसन्न हो जाती हैं कि मुझे देवताओं का राजा इंद्र प्रेम करते हैं और वह उससे प्रभावित हो उसके साथ सहवास कर लेती हैं. इंद्र जब कुटिया से निकल रहा होता है, तभी वहाँ गौतम ऋषि पहुँच जाते हैं और कुपित होकर इंद्र को अण्डाशय विहीन होने का शाप देते हैं. वो अपनी दुराचारिणी पत्नी पर भी क्रोधित हैं, वो उसे शाप देते हैं कि वो अदृश्य होकर इसी आश्रम में राख के ऊपर हजारों साल तक हवा पीकर उपवास करते हुए पड़ी रहेगी. जब राम और लक्ष्मण यहाँ से गुजरेंगे तब उसका उद्धार होगा और वो पुनः अपने रूप में आकर मेरे पास आ जाओगी. और आगे ऐसा ही होता भी है.

यहाँ अहिल्या इंद्र के साथ एकबार सहवास (वन नाईट स्टे) की हैं, उन्होंने अपने मन में इंद्र को स्थान नहीं दिया है, फिर भी उन्हें हजारों साल का प्रायश्चित करना पड़ा. आपने तो राम के रहते अपना मन अली मौला को दे दिया है. आपके न चाहने पर भी अली मौला आप पर हावी हो जाता है. इस दुराचरण का प्रायश्चित आपको करना ही पड़ेगा. आप इंद्र और गौतम दोनों का मजा एकसाथ नहीं ले सकतें. आपको ये फैसला करना पड़ेगा कि आपको इंद्र के साथ भागना है या गौतम के साथ रहना है. गौतम के साथ दुबारा रहने के लिए आपको अपनेआप को प्रायश्चित्त के आग में तपाना होगा. आपको स्वयं से व्यासपीठ का सम्मान करते हुए, उससे इस जन्म भर के लिए दूरी बना लेनी चाहिए और एकांत में जाकर पुनः राम नाम के जप में मन लगाना चाहिए.

आपको सम्मानपूर्वक स्वयं से प्रायश्चित का मार्ग अपनाना चाहिए, अन्यथा लोग जबर्दस्ती आपसे प्रायश्चित करने पर उतारू हो जायेंगे. आप बहुत ऊँचाई पर बैठे हैं, आपको जमीन की हकीकत दीख नहीं रही है. आज लोगों में वही गुस्सा दिखाई दे रहा है जो गुस्सा भारत विभाजन के बाद गाँधी जी के लिए था. वो भी गुजरात की धरती से निकले बापू थें और आप भी गुजरात की धरती से ही निकले बापू हैं.

मैं नहीं चाहता महात्मा गांधी की तरह दोबारा एक हिन्दू द्रोही या दूसरा बापू बनाकर आपको इस देश पर फिर थोप दिया जाये. हम सबकी मात्र यही अभिलाषा है कि आप आगामी जीवन काल में व्यासपीठ से दूरी बनाकर एकांत में अपने पापों का अंत और प्रायश्चित करें !

आपका पूर्व भक्त

https://bit.ly/2BQtY69

What would you like to convey to Indians?

India has very wide history. People have lived on this land since harappa civilization, may be even before that.

Some months ago the Ayodhya verdict was given by SC of India. It was based on the archeological survey conducted by ASI. The verdict was delayed in during 2000s due to affidavit filed by then Gov’t stating “ Ram is a mythological figure “.

After that in 2019 the verdict was ruled in favor of the Hindus. Due to evidence given by ASI stating that “ the Babri Masjid was build on underlying non Islamic structure “ and they said it is a temple indeed.

So what is my point?

The history of India is being twisted to fit a small group’s agenda. Glorifying the incidents that shouldn’t be a part of history at all.

Even in the Ram temple this same thing has delayed the justice.

Two days ago while clearing the grounds of the alloted lands for temple, people found idols, sculptures and many other historical figures underground. Investigation is going on.

These images have been surfacing on twitter, I cannot be sure that this is real deal, but many media houses have reacted on this matter.

History thaught to us glorify muglas as one of the great rulers of India.

But we always ignore even bigger names.

-Mauryan Empire

-The Mourya empire

-Gupta empire

-The Wodeyar Kingdom or Kingdom of Mysore

-Hoysala empire

-Maratha empire

-The Rajputs dynasty

-Reign of Immadi Pulakeshi, The Chalukya empire

-Chola empire

-Vijyanagar empire

-Satavahana dynasty

-The Sikh empire and list goes on…..

Stay home and upvote 😁.

PS: “ I am not an expert on history or anything. I was just curious about this find on the site so i looked up and found some information, which is what i am sharing here”

Also if anyone have read about old kingdoms that i didnt mention please comment down, i will edit the answer accordignly.

Sources:

1. ‘No historical proof that Ram was real’

2. For historians, Ram remains a myth | India News – Times of India

3. Ram temple trust confirms idols recovery

4. राम जन्मभूमि: जिलानी ने खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों पर उठाए सवाल, संतो ने दिया करारा जवाब

Source: https://bit.ly/2ztcc8s