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सोचने योग्य बात #2

घटना उस समय की है छोटे भाई बी डी एस कर के आया था।बोला भईया मेरा एक निजी अस्पताल बनवा दिजिए और जो छोटा-मोटा काम करते हैं बन्द कर दिजिए। अस्पताल में अन्दर मैं देख लूंगा और बाहर का आप देख लीजिएगा। फिर देखिए मैं कैसे घर की तकदीर बदल देता हूं। कुछ साल में निजी अस्पताल बन गया।सब ठीक-ठाक चल रहा था ज्यादा दिन नही मात्र छः महीने तक। एक दिन बोला भईया आप दूसरा काम देख लिजिए। मैं चुपचाप अस्पताल छोड़ दिया।एक महिने बाद बोला भईया मुझे अलग रहना है। मैं बोला ठीक है पापा से पुछ लो। खैर कुछ दिन बाद अलग हो गया। अस्पताल बनते समय ही घर का बहुत ही समान पहले ही लेगया था अस्पताल में परिवार रहने की व्यवस्था है।बाद में जो घर में समान या वस्तु था सब में आधा किया।घर में आठ पंखा था चार पहले ही ले गया अस्पताल में,घर पे चार टी बी था दो पहले ही लेगया था टी बी अस्पताल में। ऐसे ही बहुत कुछ। मेरे समझ में कुछ नहीं आ रहा था।

मैं सोचता हूं गलती कहां हो गई। लगता है उसे लालच ने दिमाग ख़राब कर दिया या उसे लगा कि अब अस्पताल बन गया,चल ही रहा है भईया की क्या जरूरत है।

बिना मेहनत किए उम्र से पहले जब कोई वस्तु या चीज मिल जाती है तो दिल और दिमाग वश में नही रहता है। यह एक खतरे का संकेत है आने वाले समय में।

क्या आप किसी से नफरत करते हैं?

जी हां, मैं उनसे नफरत करता हूं

  • जो जिहादी हैं,
  • जो मुझे काफिर के तरह समझते हैं,
  • जो भारत में शरिया लागू करना चाहते हैं,
  • जो गजवा ए हिंद स्थापित करना चाहते हैं,
  • जो हमारे सैनिकों पर पत्थर फेंकते हैं,
  • जो भारत को टुकड़ों में बांटना चाहते हैं।

और मुझे तनिक भी चिंता नहीं कि कौन मुझसे खुश होंगे और कौन नाराज। मुझे तनिक भी शर्मिंदगी भी नहीं है यह कहने में कि मैं उनसे नफरत करता हूं और हमेशा करता रहूंगा।

मूल लेखक अंकित पाठक

स्त्रोत https://bit.ly/2ZABQCK