1989 में लोकतंत्र बहाली को लेकर जन आंदोलन हुआ था, जिसके पीछे ज़्यादातर छात्र ही थे. इस आंदोलन ने इतनी व्यापकता हासिल की थी कि 3 , 4 जून 1989 को चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित तियानमेन चौक पर सरकार के विरोध में एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए थे. इस विद्रोह को कुचलने के लिए चीन सरकार ने मार्शल लॉ लगाया था और
चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने तोपों, बंदूकों व टैंकों से गोलीबारी कर प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया था.
प्रदर्शन का निर्दयतापूर्ण दमन करते हुए नरसंहार किया. चीनी सेना ने बंदूकों और टैंकरों के ज़रिये शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे नि:शस्त्र नागरिकों का दमन किया.
बताया जाता है कि इस चौक पर छात्र सात सप्ताह से डेरा जमाए बैठे थे. इस प्रदर्शन का जिस तरह से हिंसक दमन किया गया ऐसा चीन के इतिहास में कभी नहीं हुआ था. आज तक इस हिंसक दमन की वजह से चीन की दुनियाभर में आलोचना की जाती है.
सरकारी आंकड़े सिर्फ 300 मौतों के जारी हुए थे, लेकिन कभी अस्ल संख्या नहीं बताई गई. कई स्रोतों से दमनचक्र में मारे गए लोगों की संख्या के अनुमान सामने आए, जिनके मुताबिक डेढ़ हज़ार से ढाई हज़ार लोगों के मारे जाने तक की बात कही गई थी. एक दावे में तो 10 हज़ार लोगों के मारे जाने तक की बात कही गई थी.
इतने बड़े विद्रोह के कारण क्या थे?
सुधारवादी छवि के कम्युनिस्ट नेता हू याओबांग की मौत अप्रैल 1989 में होने के बाद उत्तर माओवादी चीन के लोगों में चीन के भविष्य को लेकर गहरी चिंताएं थीं. उस समय की चीनी सरकार की नीतियां भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही थीं. देश में हर तरफ महंगाई, भ्रष्टाचार, नई अर्थव्यवस्था के लिए ग्रैजुएट्स के रोज़गार को लेकर सीमित सोच, प्रेस की स्वतंत्रता का हनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन जैसे कई मुद्दों पर लोग नाराज़ थे.
सबसे बड़ी चिंता यह थी कि एक राजनीतिक पार्टी सिस्टम को कानूनी किया जा रहा था यानी सत्ता तानाशाही की तरफ बढ़ रही थी.
इन तमाम मुद्दों को लेकर सरकार का विरोध शुरू हुआ और इन प्रदर्शनों को इतना जन समर्थन मिला कि 3 और 4 जून 1989 को तियानमेन स्क्वायर पर एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए थे.
घटना से संबंधित कुछ तिथियां
4 जून 1989 : 3 और 4 जून की दरम्यानी रात एक बजे से चीनी सेना ने तियानमेन स्क्वायर पर गोलीबारी शुरू की और दिन भरे चले इस दमनचक्र में नागरिकों और छात्रों को मौत के घाट उतारा गया. मौतों का औपचारिक व वास्तविक आंकड़ा तक जारी नहीं किया गया.
5 जून 1989 : मशहूर टैंकमैन वाकया हुआ. एक प्रदर्शनकारी टैंकों को रोकता हुआ अकेला सड़क पर टैंकों के सामने खड़ा दिखा और इस तस्वीर को सालों तक चीन ने प्रतिबंधित रखा. इसी दिन, हांगकांग में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के आयोजन में 70 हज़ार लोग जुटे.
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