राम मंदिर उत्खनन और बौद्ध अवशेष का सत्य

जन्मभूमि उत्खनन में जो भी मूर्तिया या अवशेष मिले हैं वे हिन्दु मन्दिर के प्रतीक हैं और इनमें कोई भी बौद्ध स्तूप के अवशेष नही हैं।

इस बात की संभावना हो सकती है कि इसमें बौद्ध मंदिर के अवशेष भी मिल जाएं क्योंकि जिन इस्लामिक आक्रमणकारियों ने मंदिरों को तोड़ा उन्होंने बौद्ध विरासतों को भी समान रूप से तोड़ा नालंदा विश्वविद्यालय इसका सबसे बड़ा सबूत है जिसमें इस्लामिक आक्रमणकारियों ने बौद्ध साहित्य की विश्व की सबसे बड़ी लाइब्रेरी जो तहस नहस कर दिया था।

बाबा साहेब अंबेडकर ने खुद अपनी पुस्तक में इस बात का जिक्र किया कि बौद्ध धर्म को इस्लामिक आक्रमणकारियों ने नष्ट किया।

असल में अयोद्धया में मिले अवशेषों के पीछे राजनीति है। जो समूह इस मामले में विवाद पैदा कर रहा है वे एक राजनैतिक विचारधारा के लोग हैं। ये देश में दलितों और मुस्लिम्स के गठजोड़ को अन्य हिंदुओं के खिलाफ एक राजनैतिक शक्ति बनाना चाह रहे हैं। इन लोगों ने कभी इस्लामिक आक्रमणकारियों द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट करने को पॉलिटिकल मुद्दा नही बनाया इनका विरोध गैर दलित हिंदुओं तक है।

क्योंकि यह साबित हो गया कि ये अवशेष हिन्दू मन्दिर के हैं इसलिए अब यह मुद्दा सोशल मीडिया में खत्म हो गया।

स्त्रोत: https://bit.ly/2zFefWV

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