सोचने योग्य बात

कल मैंने 550 रु किलो की दर से घी लिया

पिताजी बोले कि हमारे समय में तो इतने रुपए में ‘ढ़ेर सारा’ घी आ जाता

मैंने बोला, पिताजी ढ़ेर सारा यानी क्या? उदाहरण देकर समझाइये।

मेरी बात सुन पिताजी शांत रह गए।

मैंने फिर पूछा, पिताजी ढ़ेर सारा क्या?

पिताजी कुछ नहीं बोले, बस चुपचाप छत पर आ गए।

ऊपर आकर वो शांति से बैठे, पानी पिया फिर बोले बेटा, ‘ढ़ेर सारा’ यानि बहुत, उदाहरण देकर कहूँ तो हमारे समय में इतने रुपए में इतना घी आ जाता कि पूरा मोहल्ला एक एक कटोरी घी पी लेता।

मैं बोला पिताजी, ये उदाहरण तो आप नीचे भी दे सकते थे।

बेटा, नीचे बहुत भीड़ थी और “भीड़ को उदाहरण समझ नही आता है।”

मैं बोला, पिताजी में समझा नही…

‘भीड़ को उदाहरण’ मतलब क्यों नही ?

पिताजी बोले… एक बार मोदी जी ने कहा था कि “विदेशों में हमारे देश का बहुत पैसा जमा है।”

भीड़ ने कहा कि कितना?

तो मोदी जी ने उदाहरण देकर समझाया, “इतना कि पूरा पैसा अगर वापस आ जाए तो सभी के हिस्से में 15-15 लाख आ जाए।

बस सुनने वालों की भीड़ तभी से “15 लाख” मांग रही है।

और ये उदाहरण अगर मैं नीचे देता तो हो सकता है कि कल कई लोग अपनी अपनी कटोरी लेकर घी मांगने आ जाते।

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