राहुल गांधी ऐसा क्यों कह रहे हैं कि “हिन्दुस्तान में लाॅकडाउन विफल हो गया है”?

जी बिलकुल सही तो कहा है आप अगर अपने चारों तरफ सर घुमाकर देखे तो आपको पता चलेगा की कैसे पुरे विश्व से कोरोना गायब हो चुका है और भारत में अभी भी मामले बढ़ते जा रहे हैं। तो फिर तो लॉक डाउन फेल ही हुआ है न।

सबसे पहले लॉक डाउन किया राजस्थान, और पंजाब ने फिर भी कांग्रेस कहती फिर रही है की लॉक डाउन सरकार ने जल्दबाज़ी में किया जबकि उनकी सरकार तो केंद्र सरकार से पहले ही लॉक डाउन कर चुकी थी तो पता नहीं अगर केंद्र फेल है तो राजस्थान और पंजाब कैसे फेल नहीं हैं जिनकी कल ही राहुल जी तारीफ कर रहे थे की वहां पर उनकी सरकार है और वहां पर पूरी तरह से उनकी पार्टी कोरोना से निपटने में सक्षम है ।

वे यह भी बताना भूल जाते हैं कि हर बार केंद्र से पहले इन दोनों राज्यों ने लॉक डाउन को आगे बढ़ाया है और आगे बढ़ाने कि वकालत की है तो कैसे यह हर बार केवल केंद्र कि गलती हो सकती है ?

वे यह भी बताना भूल जाते हैं उनकी पंजाब सरकार के मुखिया ने ही केंद्र से लॉक डाउन में छूट देने के लिए कहा था कि अब कोरोना तो लम्बे समय तक चलने वाली बीमारी है इस कारण देश को बंद नहीं रखा जा सकता और सरकार को अब कुछ रियायतों के साथ लॉक डाउन को चरणबद्ध तरीके से खोलना चाहिए।

मतलब या तो राहुल जी खुद को जरूरत से अधिक समझदार मानते हैं या भारत कि जनता को जरूरत से अधिक मुर्ख। मतलब या तो राहुल जी की खुद की सरकार उनसे बात करके फैसले नहीं लेती या फिर वे उनके फैसलों को मानते नहीं तभी तो उनका हर बयान उनकी पार्टी कि सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से मेल नहीं खाता।

किसी ने नहीं कहा था कि लॉक डाउन से कोरोना ख़त्म होगा और एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर मुझे भी यह पहले से ही पता था कि लॉक डाउन के बाद भी कोरोना ख़त्म नहीं होगा, पर लॉक डाउन इसीलिए किया गया था कि इस से सरकार को मरीज़ो के इलाज़ के लिए जरूरी इंतज़ाम करने का समय मिल जाए और ऐसा हुआ भी है |

जो जरा सा भी बुद्धिमान होगा इस बात से सहमत होगा कि लॉक डाउन के कारण कोरोना फैलने से रुका है। पर हम हमेशा तो लॉक डाउन में नहीं रह सकते इसी कारण अब लॉक डाउन को खोला जा रहा है और सरकार रोज़ बढ़ने वाले मरीज़ों का इलाज़ करने के लिए तैयार है।

राहुल जी को तो यह नहीं दीखता उन्हें तो जब

सरकार ने लॉक डाउन नहीं किया तब उसकी बुराई करनी थी कि सरकार ने लॉक डाउन क्यों नहीं किया ? इस से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं | आज भी उनके प्रवक्ता कहते दिखते हैं कि उड़ानों को क्यों नहीं रद्द किया गया था, और अगर सरकार ने रद्द कर दिया होता तो यह कहकर रोते कि भारतियों को मरने के लिए छोड़ दिया |

जब लॉक डाउन कर दिया तब उसकी बुराई यह कहकर करते हैं की मज़दूरों को घर जाने का समय ही नहीं दिया |

जब लॉक डाउन नहीं हटाया तब उसकी बुराई करनी थी कि इस कारण छोटे छोटे व्यवसाय ख़त्म हो रहे हैं |

अब खोल दिया तो भी बुराई करनी है कि लॉक डाउन हटाने से मामले बढ़ रहे हैं |

पहले रघुराम राजन के साथ इंटरव्यू करके कहते हैं कि अर्थव्यवस्था के लिए पैसंठ हज़ार करोड़ कि आवश्यकता है और जब सरकार ने बीस लाख करोड़ का पैकेज दिया तो उसे खोखला बता रहे हैं।

तो वे एक ऐसे बाजे की तरह हैं जिसे कैसे भी बजा लो उस से केवल एक ही आवाज़ निकलती है और वो है सरकार विरोध कि आवाज।

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