भारत की इतिहास और राजनीति की पुस्तकों में बकवाश पढ़ाई जाती हैं जो हमारे किसी काम की नहीं है।
अतः हमें इन दोनों पुस्तकों में आवश्यक बदलाव करवाया जाना चाहिये।
इतिहास:- इतिहास की किताबो में अलंकारों का प्रयोग नहीं होना चाहिए जैसे कौन प्रतापी था ,या कौन महान था,या कौन दयालु या अच्छा ,बुरा आदि था।
इतिहास की पुस्तकों में सिर्फ फैक्ट होने चाहिए शेष सभी बातें पाठक के विवेक पर छोड़ देनी चाहिए।
जैसे
किसी राजा की कितनी सेना थी,कौनसे हथियार थे,हथियार कौन बनाता था।कर व्यवस्था कैसी थी,न्याय व्यवस्था कैसी थी।कितने युद्ध लड़े ,सामने वाले की सैनिक संख्या और हथियार आदि इस प्रकार के फैक्ट होने चाहिए।
अब इन तथ्यों के आधार पर पाठक स्वयं तय करेगा कि कौन राजा महान था या अच्छा था।
इस प्रकार के इतिहास लेखन से हमे क्या फायदा :-
इसमे मुझे जो फायदा नजर आता है वो इस प्रकार है।हमारे इतिहासकारों ने युद्ध मे इस्तेमाल किये जाने वाले हथियारों को किताबो में बहुत कम दर्ज किया है
इससे लोगो को हथियारों का महत्व कम समझ मे आता हैं।
आज तक दुनिया के जीतने भी युद्ध हुए है विजेता सदैव बेहतर हथियार वाला ही रहा हैं।आप सिकन्दर से गोरी,बाबर से अंग्रेज या यूरोप के युद्ध ,या कोई दूसरा युद्ध देख ले और दोनों सेनाओं के हथियारों का अवलोकन करें तो विजेता वो ही पक्ष रहा है जिसके पास निर्णायक हथियार थे।
सैनिक संख्या बहुत कम मायने रखती हैं।
पेड इतिहासकार इस बिंदु को छुपाने के लिये रणनीति ,कूटनीति ,बहादुरी, जैसे लब्जो का इस्तेमाल करते है।
जैसे ही जनता के पास फैक्ट जाएंगे तो जनता स्वयं हथियारों का महत्व समझ जाएगी।
पेड मीडिया की अफीम चाटने वाले कई कुबुद्धिजीवी आज भी सेना पर खर्च को बोझ समझते हैं।वो लोग सेना के खर्च में कटौती करके शिक्षा स्वास्थ्य, और अन्य विकास कार्यों में लगवाना चाहते है।
जैसे ही इतिहास की सही जानकारी लोगो के पास जाएगी तो लोगो को समझ मे आ जाएगा कि दुनिया का इतिहास युद्धओ का इतिहास हैं, युद्ध कभी नहीं रूकने वाली प्रक्रिया हैं ।
जिस देश की सेना कमजोर हुई उस देश मे कोई विदेशी आक्रांता आया और उसे लूट लिया गया।
पहले यह लूट प्रत्यक्ष होती थी लेकिन वर्तमान में इसे fdi यानी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहते हैं। अर्थात fdi के माध्यम से लूटा जाता हैं।
राजनीति:-राजनीति में सभी देशों के संविधान के बजाय उन कानूनों को पढ़ाया जाना चाहिए जिससे वहाँ की जनता का सत्ता पर नियंत्रण बढ़ता है।
जैसे अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस जैसे देशों में जूरी सिस्टम है जिससे वहाँ न्याय जल्द मिलता है यह तथ्य भारत की राजनीति की किताबो में नहीं मिलता हैं।
अमेरिका में जिला शिक्षा अधिकारी, जिला पुलिस प्रमुख ,पब्लिक प्रोसिक्यूटर जैसे टोटल 11 पदों के अधिकारी जनता द्वारा सीधे चुने जाते है तथा उन्हें जनता कभी भी नोकरी से निकाल सकती है।
स्विट्जरलैंड में प्रत्येक व्यक्ति के पास हथियार रखने का कानून हैं।
मेरा मतलब है दुनिया के विकसित देशों के कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन करवाया जाना चाहिए ,ताकि लोगो को समझ मे आ सके कि कौनसे कानून सही है और कौनसे कानून गलत हैं।
मूल लेखक गणेश राजपुरोहित
स्त्रोत https://bit.ly/2XC8NMk